पेगासस(Pegasus) क्या है ? How Pegasus works?

July 23, 2021 · Team Praman · news

 

पेगासस(Pegasus) क्या है -; 

पेगासस(pegasus) एक प्रकार का मलसियस(Malicious) या कहे मैलवेयर(Malware) सॉफ्टवेयर है। जिसको जासूसी के श्रेणी में रखा गया है। 

मैलवेयर(Malware) या मलेसियस(Malicious) सॉफ्टवेयर क्या है 

   ऐसे सॉफ्टवेयर जो विशेष रूप से किसी कंप्यूटर सिस्टम को बाधित करने, क्षतिग्रस्त करने या सिस्टम बिना अनुमति के एक्सेस प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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मैलवेयर सॉफ्टवेयर के मुख्यतः ३ भागो में विभजित कर सकते है वैसे तो इसे 11 भागो में विभाजित किया गया है पांच मुख्यतः तीन 

(1) virus-; 

यह एक विशेष प्रकार की कोडन होती है जो सिस्टम में अपने आप install हो जाती हो। जिसका मुख्य उद्देश्य  सिस्टम को corrupt करना या डेटा को नष्ट करना आदि है 

(2)spyware-;  

 स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ़्टवेयर है जिसे आपके कंप्यूटर डिवाइस में प्रवेश करने, आपका डेटा एकत्र करने और आपकी सहमति के बिना किसी तीसरे-पक्ष (THIRD  PARTY )  को भेजने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

(3)Ransomware-;

                        एक प्रकार का मलेसियस सॉफ़्टवेयर जिसे किसी कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश कर तब तक अवरुद्ध करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जब तक कि एक राशि का भुगतान नहीं किया जाता है।

पेगासस को इज़राइली फर्म NSO GROUP  द्वारा विकसित किया गया है जिसे 2010 में स्थापित किया गया था।

Pegasus कैसे करता है कार्य( How Pegasus works )-;

पेगासस हमला करने के लिए Android और  iOS  उपकरणों में अनदेखे कमजोरियों का फायदा उठाता है। इसका मतलब है कि एक फोन संक्रमित हो सकता है, भले ही उसमें नवीनतम Security patch  स्थापित हो।

2016 में पेगासस का एक version ढूढ़ा गया था जिसमे टारगेट को एक मलेसियस लिंक को उसको ईमेल या text massage पर भेजा जाता है जिसेspear-fishing कहा जाता है। लेकिन  2019 तक, पेगासस व्हाट्सएप पर एक मिस्ड कॉल के साथ एक डिवाइस में घुसपैठ कर सकता है और इस मिस्ड कॉल के रिकॉर्ड को भी हटा सकता है, जिससे उपयोगकर्ता के लिए यह जानना असंभव हो जाता है कि उन्हें TARGET  किया गया था। 

भारत में ये समस्या अत्याधिक विकराल है-:

उस वर्ष मई में, व्हाट्सएप ने कहा कि पेगासस ने अपने कोड में एक बग का फायदा उठाते हुए 1,400 से अधिक Android फोन और i phone  को इस तरह से संक्रमित किया, जिसमें सरकारी अधिकारी, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे। इसने जल्द ही बग को ठीक कर दिया।

भारत में ये समस्या अत्याधिक विकराल है क्योंकि इस समस्या के समाधान के लिए भारत में स्पष्ट कानूनों का अभाव है। अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए हम ऐसी महत्वपूर्ण गतिविधियों तक विदेशी कंपनियों की पहुँच सुनिश्चित कर देते हैं। जो हमारी स्वंय की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाती है।

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