Tag: हिंदी साहित्य

श्रवण कुमार ‘शाश्वत’ की कविता…

May 15, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch हथेलियां सिकुड़ती हैं रोटी की खातिर,फफोले निकलते हैं बेटी की खातिर।बढ़ता हूँ आगे फिर मुड़ जाता हूँ,बिखड़ता हूँ फिर खुद जुड़ जाता हूँ।रास्ते का उड़ता धूल हूँ, समझ सकता हूँ।बेबस मजदूर हूँ, समझ सकता हूँ। कभी स्कूल बनाया तो कभी अस्पताल,कभी भूख का भी रहा है हड़ताल।फिर भी ना भुला अपनी जिम्मेदारी,हमेशा किया […]

रोहित गुस्ताख़ की ग़ज़लें…

April 27, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Gazal – Sahitya Manch ग़ज़ल_1 हर पल इक पागल की ख़ातिरख़्वाब सजाये कल की ख़ातिर जिस पल में जीनी थीं सदियाँआया वो इक पल की ख़ातिर बेच गिटार हुआ दीवानातेरी इस पायल की ख़ातिर ले आये दिल बुनकर अपनासर्दी में कम्बल की ख़ातिर ठुकरा दी है जग की दौलतइक तेरे आँचल की ख़ातिर ग़ालिब की […]

अभिजित अयंक की ग़ज़लें…

March 30, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch– gazal ग़ज़ल-1 वहां पर फूल संग खुशबू दिखे हैजहां पर इश्क़ का साधू दिखे है ये पत्थर फूल बन कर लग रहे हैंअलग ही कैस का जादू दिखे है मोहब्बत इस तरह हम कर रहे हैंकि जिसमें हर घड़ी बस तू दिखे है थे काले अब्र औ तारे नहीं थेतभी फिर दश्त में […]

नील सुनील की ग़ज़लें…

March 22, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch ग़ज़ल-1ज़ख़्म ताज़ा इस बहाने से मिला थाहै  पुरानी  कील  कैलेंडर  नया  था दरमियाँ ही  चुप्पियाँ  पसरी  पड़ी थीदूरियाँ कुछ भी न थी पर फ़ासला था आ रहा है याद  वो रह  रह के  मुझकोवक्ते रुख़सत कान में कुछ तो कहा था दोपहर  की नींद  थी और  धूप ज़्यादाख़ाब जो पलकों पे था वो […]

आशुतोष मिश्रा ‘अज़ल’ की ग़ज़लें…

March 11, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya manch ग़ज़ल-1कर  ज़रा     और    इज़ाफ़ा   मिरी   हैरानी   मेंमेरी    तस्वीर    बना    बहते     हुए   पानी   में वो   शब-ए-वस्ल  चराग़ों  को  बुझा  कर  बोलेरौशनी   है    कहाँ    दरकार   बदन-ख़्वानी   में देख  कर  चाँद  को  हर   रात   यही  सोचता हूँचाक   पर   छोड़  गया  कौन  इसे  बे-ध्यानी  में मेरी    तन्हाई     मेरे    साथ   खड़ी   देखती   हैरक़्स   करता   है   हिरन   याद   का  […]

माँ को समर्पित दोहे…

February 23, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

माँ ममता की मूर्ति है , भक्ति करे निष्काम ।चरणों में उनकी दिखे, जन्नत चारों धाम ।। देवी, जननी औ’ धरा, माता के उपमान ।माता के यशगान को, करते वेद-कुरान।। माँ को जब भी देखता, खुशियाँ मिले अपार ।रब के दूजे रूप को, पूजे यह संसार ।। लिये स्वर्ग की चाह वह, घूमे चारों धाम।जिसके […]