पिता नाम कर्तव्य का, पिता नाम संकल्प।कहाँ पिता का विश्व में, कोई और विकल्प।। पिता पूर्ण परिवार हित, करते हैं तप-कर्म।तभी पिता को मानता, वेद गगन औ धर्म।।…
Sahitya Manch हथेलियां सिकुड़ती हैं रोटी की खातिर,फफोले निकलते हैं बेटी की खातिर।बढ़ता हूँ आगे फिर मुड़ जाता हूँ,बिखड़ता हूँ फिर खुद जुड़ जाता हूँ।रास्ते का उड़ता धूल…
1.Mizaaj Dairy ज्यादातर वनस्पतियांजब पतझड़कीओर रुख़ करतीं हैंजंगलपलाश को थामेआगे बढ़ता है। मिज़ाज (द्वारा लिखित “उपन्यास रात के जूडे़ में पलाश के फूल“) से 2.क्या क्या लिखें लिखने…
Sahitya manch ग़ज़ल-1कर ज़रा और इज़ाफ़ा मिरी हैरानी मेंमेरी तस्वीर बना बहते हुए पानी में वो शब-ए-वस्ल चराग़ों को बुझा कर बोलेरौशनी है कहाँ दरकार बदन-ख़्वानी में देख …