Category: साहित्य मंच

Festival June 19, 2022

पिता नाम कर्तव्य का, पिता नाम संकल्प।कहाँ पिता का विश्व में, कोई और विकल्प।। पिता पूर्ण परिवार हित, करते हैं तप-कर्म।तभी पिता को मानता,…

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साहित्य मंच May 15, 2022

Sahitya Manch हथेलियां सिकुड़ती हैं रोटी की खातिर,फफोले निकलते हैं बेटी की खातिर।बढ़ता हूँ आगे फिर मुड़ जाता हूँ,बिखड़ता हूँ फिर खुद जुड़ जाता…

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साहित्य मंच April 27, 2022

Gazal - Sahitya Manch ग़ज़ल_1 हर पल इक पागल की ख़ातिरख़्वाब सजाये कल की ख़ातिरजिस पल में जीनी थीं सदियाँआया वो इक पल की…

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साहित्य मंच April 15, 2022

Sahitya Manch : गौतम गोरखपुरी की ग़ज़लें ग़ज़ल_1कोई भी नहीं है हमारा सिवा इन किताबों केमेरी ज़िन्दगी का सहारा सिवा इन किताबों केये भी…

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साहित्य मंच April 8, 2022

पुस्तक समीक्षा - उपन्यास 'रात के जूड़े में पलाश के फूल' - "मिजाज'' हर्ष मणि सिंह "मिजाज" का उपन्यास रात के जूड़े में पलाश…

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साहित्य मंच March 30, 2022

Sahitya Manch- gazal ग़ज़ल-1 वहां पर फूल संग खुशबू दिखे हैजहां पर इश्क़ का साधू दिखे है ये पत्थर फूल बन कर लग रहे…

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साहित्य मंच March 22, 2022

Sahitya Manch ग़ज़ल-1ज़ख़्म ताज़ा इस बहाने से मिला थाहै  पुरानी  कील  कैलेंडर  नया  था दरमियाँ ही  चुप्पियाँ  पसरी  पड़ी थीदूरियाँ कुछ भी न थी…

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साहित्य मंच March 20, 2022

1.Mizaaj Dairy ज्यादातर वनस्पतियांजब पतझड़कीओर रुख़ करतीं हैंजंगलपलाश को थामेआगे बढ़ता है। मिज़ाज (द्वारा लिखित "उपन्यास रात के जूडे़ में पलाश के फूल") से…

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साहित्य मंच March 11, 2022

Sahitya manch ग़ज़ल-1कर  ज़रा     और    इज़ाफ़ा   मिरी   हैरानी   मेंमेरी    तस्वीर    बना    बहते     हुए   पानी   में वो   शब-ए-वस्ल  चराग़ों  को  बुझा  कर  बोलेरौशनी   है    कहाँ   …

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साहित्य मंच March 8, 2022

प्रस्तुत रचना लेखक की प्रसिद्ध रचना ''रात के जूड़े में पलाश के फूल " का एक छोटा सा अंश है। रचना के सवांदो और…

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