Category: आपका मंच

Happy Father’s Day: पिता को समर्पित दोहे…

June 19, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

पिता नाम कर्तव्य का, पिता नाम संकल्प।कहाँ पिता का विश्व में, कोई और विकल्प।। पिता पूर्ण परिवार हित, करते हैं तप-कर्म।तभी पिता को मानता, वेद गगन औ धर्म।। परमपिता को है मिला, पिता शब्द सम्मान।पिता सकल संसार में, हैं तपनिष्ठ महान।। नाम करेगा पुत्र कल, मन में रख विश्वास।पिता काटते उम्र भर, खुशियों का वनवास […]

श्रवण कुमार ‘शाश्वत’ की कविता…

May 15, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch हथेलियां सिकुड़ती हैं रोटी की खातिर,फफोले निकलते हैं बेटी की खातिर।बढ़ता हूँ आगे फिर मुड़ जाता हूँ,बिखड़ता हूँ फिर खुद जुड़ जाता हूँ।रास्ते का उड़ता धूल हूँ, समझ सकता हूँ।बेबस मजदूर हूँ, समझ सकता हूँ। कभी स्कूल बनाया तो कभी अस्पताल,कभी भूख का भी रहा है हड़ताल।फिर भी ना भुला अपनी जिम्मेदारी,हमेशा किया […]

रोहित गुस्ताख़ की ग़ज़लें…

April 27, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Gazal – Sahitya Manch ग़ज़ल_1 हर पल इक पागल की ख़ातिरख़्वाब सजाये कल की ख़ातिर जिस पल में जीनी थीं सदियाँआया वो इक पल की ख़ातिर बेच गिटार हुआ दीवानातेरी इस पायल की ख़ातिर ले आये दिल बुनकर अपनासर्दी में कम्बल की ख़ातिर ठुकरा दी है जग की दौलतइक तेरे आँचल की ख़ातिर ग़ालिब की […]

गौतम गोरखपुरी की ग़ज़लें…

April 15, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch : गौतम गोरखपुरी की ग़ज़लें ग़ज़ल_1 कोई भी नहीं है हमारा सिवा इन किताबों केमेरी ज़िन्दगी का सहारा सिवा इन किताबों के ये भी एक सच है कि उसके बिछड़ जाने के बादकिसी को नहीं मैं पुकारा सिवा इन किताबों के गई है संवर अब मेरी जिंदगी पर किसी को भीकरूंगा नहीं मैं […]

“मानव जिजीविषा का एक सुसंगठित दस्तावेज” उपन्यास ‘रात के जूड़े में पलाश के फूल’ – मिजाज

April 8, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

पुस्तक समीक्षा – उपन्यास ‘रात के जूड़े में पलाश के फूल’ – “मिजाज” हर्ष मणि सिंह “मिजाज” का उपन्यास रात के जूड़े में पलाश के फूल मानव जिजीविषा का एक सुसंगठित दस्तावेज है। एक ऐसा दौर जहां चारो ओर भ्रम का बाजार फैला हुआ हो, तो तसल्ली कैसे बटोरी जाय , वह दौर जब निराशा, […]

अभिजित अयंक की ग़ज़लें…

March 30, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch– gazal ग़ज़ल-1 वहां पर फूल संग खुशबू दिखे हैजहां पर इश्क़ का साधू दिखे है ये पत्थर फूल बन कर लग रहे हैंअलग ही कैस का जादू दिखे है मोहब्बत इस तरह हम कर रहे हैंकि जिसमें हर घड़ी बस तू दिखे है थे काले अब्र औ तारे नहीं थेतभी फिर दश्त में […]

नील सुनील की ग़ज़लें…

March 22, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya Manch ग़ज़ल-1ज़ख़्म ताज़ा इस बहाने से मिला थाहै  पुरानी  कील  कैलेंडर  नया  था दरमियाँ ही  चुप्पियाँ  पसरी  पड़ी थीदूरियाँ कुछ भी न थी पर फ़ासला था आ रहा है याद  वो रह  रह के  मुझकोवक्ते रुख़सत कान में कुछ तो कहा था दोपहर  की नींद  थी और  धूप ज़्यादाख़ाब जो पलकों पे था वो […]

मिज़ाज डायरी – हर्ष मणि सिंह ”मिज़ाज”

March 20, 2022 · pramanu12345

1.Mizaaj Dairy ज्यादातर वनस्पतियांजब पतझड़कीओर रुख़ करतीं हैंजंगलपलाश को थामेआगे बढ़ता है। मिज़ाज (द्वारा लिखित “उपन्यास रात के जूडे़ में पलाश के फूल“) से 2.क्या क्या लिखें लिखने को बहुत कुछ था,क्या क्या लिखते,कथा,कहानी,कि सबर,तलब ,गिरह,आह, और सिला हयात का,कि तुम्हारे जवाबों के सवाल या,इतिहास का तजुर्मा,कि नक्श का हिजाब ए फ़ितन,और सोखी-ए-तहरीर,तुम कहो तो […]

आशुतोष मिश्रा ‘अज़ल’ की ग़ज़लें…

March 11, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

Sahitya manch ग़ज़ल-1कर  ज़रा     और    इज़ाफ़ा   मिरी   हैरानी   मेंमेरी    तस्वीर    बना    बहते     हुए   पानी   में वो   शब-ए-वस्ल  चराग़ों  को  बुझा  कर  बोलेरौशनी   है    कहाँ    दरकार   बदन-ख़्वानी   में देख  कर  चाँद  को  हर   रात   यही  सोचता हूँचाक   पर   छोड़  गया  कौन  इसे  बे-ध्यानी  में मेरी    तन्हाई     मेरे    साथ   खड़ी   देखती   हैरक़्स   करता   है   हिरन   याद   का  […]

हम न होंगे- मिज़ाज

March 8, 2022 · संदीप राज़ आनन्द

प्रस्तुत रचना लेखक की प्रसिद्ध रचना ”रात के जूड़े में पलाश के फूल “ का एक छोटा सा अंश है। रचना के सवांदो और लेखक के बारीक अवलोकन के लिए आपको इनकी इस रचना को जरूर पढ़ना चाहिए ——————————- मोहब्बत करने वालेजरा भी कम न होंगे,तेरी फुर्सत में आकररहने वालेहम न होंगे ,इबादत में भी […]